जौ क्या होता है?, जौ (Barley) के प्रकार, फायदे, उपयोग, नुकसान, आदि से जुड़ी सभी जानकारी – Barley in Hindi

आज जानेंगे जौ के फायदे और नुकसान की पूरी जानकारी (Barley in Hindi) के बारे में क्योंकि वर्तमान के समय में भले ही जौ का इस्तेमाल लोग काफी कम करने लगे हैं परंतु एक समय ऐसा भी था जब इसे अनाजों का राजा कहा जाता था, जिसके पीछे वजह थी इसके अंदर पाए जाने वाले विटामिन और मिनरल की अधिक मात्रा। सिर्फ विटामिन और मिनरल ही नहीं इसके अंदर अन्य बहुत सारे पौष्टिक तत्व पाए जाते थे।

यही वजह है कि पहले के टाइम में भी जौ का इस्तेमाल किया जाता था और वर्तमान के समय में भी जिन लोगों को इसकी उपयोगिता पता है, वह इसका इस्तेमाल दैनिक तौर पर करते हैं। आज हम इस आर्टिकल में जौ के ऊपर ही चर्चा करने वाले हैं। आज के इस लेख में जानेंगे कि Jau Kya Hota Hai, Barley meaning in hindi, जौ के फायदे, Barley in Hindi, जौ के नुकसान, आदि की जानकारीयां पूरा डिटेल्स में जानने को मिलेगा, इसलिये इस लेख को सुरू से अंत तक जरूर पढे़ं।

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जौ क्या होता है? – What is Barley in Hindi

Barley In Hindi 6
Barley In Hindi 6

Barley को हिंदी मे जौ कहते है। Barley का Scientific नाम Hordeum है। जो कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, मैग्नीशियम, आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस, विटामिन सी, राइबोफ्लेविन और नियासिन जैसे तत्वों से भरपूर जौ की गिनती अनाजों में होती है। संस्कृत लैंग्वेज में इसे यव कहकर बुलाया जाता है और रूस, जर्मनी, अमेरिका, भारत यह कुछ ऐसे देश है, जहां पर इसकी खेती भारी मात्रा में की जाती है। 

इसका इस्तेमाल आज काफी कम लोग ही करते हैं परंतु जिन लोगों को इसके फायदे के बारे में पता है, वह दैनिक तौर पर इसे लेते हैं। देखा जाए तो मुख्य तौर पर इसका पानी अनेक प्रकार से हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। अंग्रेजी भाषा में जौ को बारले कहा जाता है।

जौ के प्रकार – Types of Barley in Hindi

नीचे जानिए जौ (Types of Barley in Hindi) कितने टाइप की होती है।

1. फ्लेक्स

इसकी गिनती सामान्य प्रकार के जौ (Barley in Hindi) में होती है और जो भोजन पहले से ही पके हुए होते हैं उसमें इसका इस्तेमाल किया जाता है। आप इसे ठंडा या फिर गरम खा सकते हैं।

2. जौ का आटा

यह बिल्कुल आटे की तरह होता है। इसका इस्तेमाल रोटियां बनाने में किया जाता है, साथ ही इसके आटे से ब्रेड भी तैयार किया जाता है।

3. ग्रिट्स

इसे तैयार करने के लिए जौ के बीज की ऊपर की जो परत होती है, उसे निकाल दिया जाता है। यह एक मोटा आटा होता है।

4. हुल्ड

इसे जौ (Barley in Hindi) का साबुत रूप कहा जाता है।

5. पर्ल बार्ले

यह बिल्कुल चमकते मोती जैसा हमें दिखाई देता है और इसके अंदर जो बीज होते हैं, वह सफेद कलर के होते हैं तथा हर बीज का रंग और आकार एक ही जैसा होता है। सुप/सलाद बनाने में इसे इस्तेमाल में लिया जाता है।

अन्य भाषा में जौ के नाम – Name of Barley in Different Languages

जौ (Barley in Hindi) के बहुत सारे नाम होते हैं। इसके बारे मे नीचे बताए गए हैं।

भाषाएंअन्य नाम
संस्कृतयव, अक्षत, कुंचकिन, हयप्रिया
हिंदीजव, जो, जौ
उर्दूजव,कन्नड़-यव, कुंचकीन
गुजरातीजौ,जव
तमिलबारलियारिसि
तेलुगुबारलीबियम
बंगालीजो
नेपालीजौ,तोसा
पंजाबीनाई, जवा 
मलयालमजवेगम्बु, यवम
मराठीजव, जवा 
अंग्रेजीमाल्टिंग बालि
अरबीशाईर, श्यईर 
पर्शियनजओ

जौ के फायदे – Benefits of Barley in Hindi

नीचे हमने आपके लिए जौ के फायदे अथवा जौ (Barley in Hindi) के एडवांटेज बताए हैं।

1. मोतियाबिंद के लिए जौ 

इंसानों की उम्र बढ़ने पर कई लोगों को मोतियाबिंद की शिकायत होने लगती है। इस परेशानी से बचने के लिए आपको जौ का सेवन करना चाहिए। इसके अंदर मौजूद औषधीय गुण मोतियाबिंद से आपको बचा सकते हैं। इसके लिए आपको त्रिफला चूर्ण के काढे में 30 मिलीलीटर जौ को उबालना चाहिए और घी मिलाकर के इसे खाना चाहिए। इससे आपको मोतियाबिंद में आराम मिलेगा।

2. सर्दी-जुकाम के लिए जौ 

सर्दी, खांसी एक ऐसी समस्या है जो अधिकतर लोगों को होती है फिर चाहे वह बड़े बूढ़े हो या फिर बच्चे हो। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए आपको थोड़ा सा घी लेना है और जौ के सत्तू में उसे मिला लेना है और इसे खाना है। यह सर्दी, जुकाम, खांसी और हिचकी की प्रॉब्लम को दूर करता है।

3. डिप्थीरिया के लिए जौ 

डिप्थीरिया की समस्या से आजादी पाने के लिए आपको 10 मिलीलीटर जौ के पत्ते का रस लेना है और उसके अंदर आपको 500 मिलीग्राम कृष्णमरीच का चूर्ण मिलाना है और इसका सेवन करना है। यह डिप्थीरिया की समस्या को धीरे धीरे कम करता है।

4. घेंघा रोग के लिए जौ 

घेंघा रोग को गोइटर भी कहा जाता है। इस रोग से बचने के लिए आप जौ का सेवन कर सकते हैं। घेंघा रोग से निजात पाने के लिए आपको सहजन के बीज, अलसी, नीम के पत्ते, सरसों और मूली के बीज को खट्टी छाछ में पीस लेना है और फिर इसका पेस्ट बना करके आपको इसे अपने गले में जहां पर घेंघा रोग हुआ है, वहां पर लगाना है। ऐसा करने से आपको आराम मिलेगा।

5. सांस की समस्या में जौ 

ऐसे लोग जिन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है, वह भी जौ का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें सबसे पहले जौ का सत्तू लेना है और उसे शहद के साथ मिलाकर के दैनिक तौर पर खाना है। यह सांस की बीमारी से परेशान लोगों को जल्दी ही सांस की बीमारी से छुटकारा दिलाती है।

6. हाइपर एसिडिटी के लिए जौ 

खराब खान-पान के कारण हमें हाइपर एसिडिटी की समस्या हो सकती है। इससे छुटकारा पाने के लिए आपको जौ का सेवन करना चाहिए। इसके लिए आपको दालचीनी, इलायची और तेज पत्ते का चूर्ण तथा शहद लेनी पड़ेगी और इसे जौ के आटे के साथ मिलाकर के उबालना पड़ेगा और फिर आपको ठंडा करके इसे पीना पड़ेगा। यह हाइपर एसिडिटी की समस्या से आपको निजात दिलाएगा।

7. पेट दर्द के लिए जौ 

मसालेदार खाना खाने के कारण अथवा हमारे पेट में कब्ज होने के कारण हमें कभी-कभी पेट दर्द का अनुभव होने लगता है। इससे छुटकारा पाने के लिए आपको जौ के आटे में मट्ठा मिला लेना है और इसका पेस्ट बना करके आपको अपने पेट पर लगाना है। ऐसा करने से आपको पेट दर्द से राहत मिलेगी।

8. डायबिटीज के लिए जौ

डायबिटीज की प्रॉब्लम में इंसानों की बॉडी में मौजूद खून में चीनी की मात्रा ज्यादा हो जाती है। इसे शुगर की बीमारी भी कहा जाता है। इससे बचने के लिए अथवा इसके प्रभाव को कम करने के लिए आपको बिना छिलके वाले जौ को लेना है और त्रिफला चूर्ण में उसे मिला करके इसका काढ़ा तैयार करना है और फिर आपको हल्का गुनगुना होने पर इसे पी जाना है। यह डायबिटीज में बहुत ही फायदेमंद साबित होगा।

9. बुखार के लिए जौ 

अगर किसी इंफेक्शन के कारण या फिर बदलते हुए मौसम के कारण आपको बुखार हो गया है, तो उसे दूर करने के लिए आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। दालचीनी, तुलसी, अदरक मे आपको जौ (Barley in Hindi) मिलानी है और इसका काढा तैयार करना है और इसे हल्का गुनगुना होने पर पीना है। यह बुखार में बहुत ही फायदेमंद साबित होता हैं।

10. जौ के पानी के फायदे

जौ (Barley in Hindi) के बहुत सारे फायदे है। रोजाना जौ का पानी पीने से जहां एक तरफ सेहत से जुड़ी कई समस्याएं दूर हो जाती हैं, जैसे की दिल की सेहत के लिए गर्भवती महिलाओं के लिए जौ का पानी, प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकता है, वजन घटाने में सहायक है वहीं दूसरी तरफ कई बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है। वहीं दूसरी तरफ कई बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है। और साथ ही शरीर को अच्छा रखता है।

जौ का उपयोग – Uses of Barley in Hindi

  • इसके बीज का सुप बनाया जा सकता है।
  • इसे उबालकर खा सकते हैं।
  • इसके आटे की रोटियां बनती है।
  • इसके आटे का ब्रेड भी बनता है।
  • सलाद में इसके बीज को पका कर डाल सकते हैं।
  • जौ की दलिया भी बनती है।
  • इसका पानी भी पिया जा सकता है।
  • इसका पाउडर भी बनता है।
  • इसकी पत्तियों का जूस भी तैयार कर सकते है।

जौ के नुकसान – Side Effect of Barley in Hindi

नीचे हमने आपको जौ (Barley in Hindi) के डिसएडवांटेज अथवा जौ के साइड इफेक्ट के बारे में जानकारी दी है।

1. दस्त 

कोई व्यक्ति अगर इसका भारी मात्रा में सेवन करता है तो उसे दस्त की प्रॉब्लम हो सकती है क्योंकि इसके अंदर लैक्सेटिव गुण पाया जाता है।

2. एलर्जी 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसके अंदर कुछ एलर्जीक गुण भी होते हैं। इसलिए अगर बच्चे इसका सेवन करते हैं तो उन्हें छोटी-मोटी एलर्जी का सामना करना पड़ सकता है।

जौ की तासीर

इसकी तासीर के बारे में बात करें तो इस की तासीर ठंडी होती है। इसीलिए गर्मियों के मौसम में इसे अलग-अलग प्रकार से इस्तेमाल में लिया जाता है। खासतौर पर तो गर्मियों के मौसम में इसका सत्तू खाया जाता है।

जौ के बीज – Barley Seed in Hindi

जौ (Barley in Hindi) एक अनाज का दाना है जिसमें एक चबाने वाली बनावट और एक हल्का, पौष्टिक स्वाद होता है। यह एक प्रकार का घास का बीज है, और इसकी खेती अक्टूबर-नवंबर के महीने में की जाती है, और मार्च तक इसे काट लिया जाता है।

जौ कहां पाया और उगाया जाता है?

हमारे भारत देश की बात करें तो इसकी खेती प्राचीन काल से ही भारत में होती आई है। इंडिया में हिमालय के जो पहाड़ी और मैदानी इलाके हैं, वहां पर लगभग 3000 मीटर की ऊंचाई पर इसकी खेती होती है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, उड़ीसा, पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात यह कुछ ऐसे इलाके हैं, जहां पर यह पाया जाता है और इसकी खेती होती है।

जौ का पानी कैसे बनाएं?

जौ (Barley in Hindi) का पानी तैयार करने के लिए सबसे पहले आपको एक चौथाई कप जौ लेनी है और उसके बाद उसे एक पतीले में डाल कर के उसे गैस पर अच्छी तरह से गर्म कर लेना है। अच्छी तरह से गर्म हो जाने के बाद आपको गैस को बंद कर देना है और उसके बाद पतीले को नीचे उतार लेना है और पतीले का जो पानी है, उसे आपको छान लेना है और उसे ठंडा होने के लिए छोड़ देना है। जब पानी ठंडा हो जाए, तब आपको पानी के अंदर नींबू का रस और शहद मिलानी है।

अगर आपके पास शहद नहीं है, तब आप उसमें चीनी भी मिला सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति डायबिटीज का रोगी है तो आपको नींबू की जगह पर इसके अंदर नमक मिला लेना है। नींबू को इसमें मिक्स करने पर इसका स्वाद काफी अच्छा हो जाता है। अब आपको बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़े इसमें डालने हैं और फिर आपको इसे पी लेना है।

जौ के पौधे की क्या पहचान है?

कई लोगों को जौ (Barley in Hindi) के पौधे की पहचान नहीं होती है। बता दें कि यह दिखाई देने में जिस प्रकार गेहूं होता है, उसी प्रकार होता है परंतु इसके बीज का जो किनारा होता है, वह थोड़ा सा नुकीला होता है और आपको इसके बीज के ऊपर एक बालो जैसी संरचना दिखाई देती है, जो कि अधिक लंबी और काफी पतली होती है।

जौ के पोषण तत्व – Nutrition value of Barley in Hindi

कोई भी खाना खाने से पहले खाने की Nutritional Value की जानकारी जरूर रखनी चाहिए।

पोषक तत्वमात्रा प्रति 100 ग्राम
Calories354
Total Fat2.3 g
Saturated fat0.5 g
Cholesterol0 mg
Sodium12 mg
Potassium452 mg
Total Carbohydrate73 g
Dietary fiber17 g
Sugar0.8 g
Protein12 g
Vitamin C0%
Calcium3%
Iron19%
Vitamin D0%
Vitamin B615%
Cobalamin0%
Magnesium33%
Nutrition value of Barley in Hindi

क्या जौ का धार्मिक महत्व भी है?

जी हां 

जौ का आटा कैसे बनता है

जौ के बीज को पीसकर

क्या हम जौ का पानी भी पी सकते हैं?

जी हां

कौन से धार्मिक कामों में जौ का इस्तेमाल किया जाता है?

हवन में 

निष्कर्ष

आज के इस लेख में आपने जाना की जौ क्या होता है?जौ के फायदे और नुकसान (Barley in Hindi) इस लेख को पूरा पढ़ने के बाद भी अगर आपके मन में Jau ke fayde aur nuksan in Hindi को लेकर कोई सवाल उठ रहा है तो आप नीचे Comment करके पूछ सकते हैं। हमारी विशेषज्ञ टीम आपके सभी सवालों का जवाब देगी। अगर आपको लगता है कि इस लेख में कोई गलती है तो आप नीचे Comment करके हमसे बात कर सकते हैं, हम उसे तुरंत सुधारने की कोशिश करेंगे।

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Author
Akanksha Shree
आकांक्षा श्री ने पटना वीमेंस कॉलेज से इंग्लिश ऑनर्स में बैचलर्स और ट्रेवल एंड टूरिज्म में सर्टिफिकेशन कोर्स किया है। इन्होंने वर्ष 2023 में अपने करियर की शुरुआत स्वास्थ्य आधारित वेब पोर्टल से की थी। अब तक इनके 50+ से भी ज्यादा आर्टिकल प्रकाशित हो चुके हैं।

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