फिटकरी क्या होता है? फिटकरी (Alum) के फायदे, प्रकार, उपयोग, नुकसान, आदि से जुड़ी सभी जानकारी – Alum in Hindi

आज हम जानेंगे फिटकरी के फायदे और नुकसान की पूरी जानकारी (Alum in Hindi) के बारे में क्योंकि फिटकरी के मल्टिपल यूसेज की वजह से हिस्ट्री में इसकी काफी इंपोर्टेंस रही हैं। फिटकरी का यूज काफी पुराने समय से चिकित्सा के क्षेत्र में किया जा रहा हैं। इसके साथ ही फिटकरी का यूज क्लोथिंग इंडस्ट्री में भी काफी लार्ज स्केल पर किया जाता हैं। किचेन और कलनरी में, फिटकरी अपनी प्रॉपर्टीज की वजह से एक फर्मिंग एजेंट का काम करती हैं, जो अचार और सब्जियों की क्रिस्पनेस को बढ़ाता हैं। फिटकरी का सबसे ज्यादा यूज पानी को प्यूरिफाई करने में किया जाता हैं।

फिटकरी की उपयोगिता को देखते हुए कहा जा सकता हैं, कि फिटकरी का यूज बहुत सी इंडस्ट्रीज में बहुत से पर्पज के लिए किया जाता हैं इसलिए आज का यह आर्टिकल हम फिटकरी पर ही लाए हैं, कि फिटकरी क्या हैं, फिटकरी खाने के फायदे, फिटकरी खाने के नुकसान, Alum in Hindi, आदि जानकारी पूरी डिटेल्स में, इसलिए हमारे साथ अंत तक जरूर बने रहे और फिटकरी से संबंधित पूरी जानकारी हासिल करें।

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फिटकरी क्या होता हैं? – What is Alum in Hindi

फिटकरी के फायदे
Alum In Hindi

फिटकरी को इंग्लिश में एलम (Alum) कहा जाता हैं। फिटकरी के साइंटिफिक नेम की बात की जाए तो इसका साइंटिफिक नेम पोटेशियम एल्यूमीनियम सल्फेट (Potassium Aluminum Sulphate) हैं। फिटकरी का केमिकल फॉर्मूला K2SO4.Al2(SO4)3.24H2O हैं, जो फिटकरी में एल्यूमीनियम, पोटेशियम, सल्फेट और पानी के कंटेंट को दर्शाता हैं। फिटकरी में मौजूद कंपाउंड एक साथ आने पर क्रिस्टल फॉर्म काफी आसानी से ले लेते हैं, और ज्यादातर बड़े और ट्रांसपेरेंट क्रिस्टल होते हैं।

फिटकरी के इंग्लिश नाम एलम की बात की जाए तो यह नाम लैटिन नाम एल्यूमेन (alumen) से लिया गया हैं। फिटकरी का आज लगभग हर इंडस्ट्री में काफी बड़े पैमाने पर यूज किया जाता हैं। फिटकरी का कलनरी यूसेज भी काफी लार्ज स्केल पर किया जाता हैं। इसमें एस्ट्रिनजेंट प्रॉपर्टीज होती हैं, जो लंबे समय तक रखे जाने वाले फूड जैसे अचार, मुरब्बे में फर्मनेस और क्रिस्पीनेस को बनाए रखने में मदद करती हैं।

फिटकरी का सबसे ज्यादा यूज पानी को प्यूरिफाई करने के लिए किया जाता हैं, क्योंकि इसमें कोएगुलेटिंग प्रॉपर्टीज होती हैं। ये प्रॉपर्टीज पानी में मौजूद गंदगी और पार्टिकल्स को इकट्ठा कर देता हैं, जिससे पानी आसानी से प्यूरिफाई हो जाता हैं। फिटकरी का यूज कॉस्मेटिक्स इंडस्ट्री में भी किया जाता हैं। फिटकरी में एंटी माइक्रोबियल प्रॉपर्टीज होती हैं, जिससे इसका यूज डिओड्रेंट और दूसरे हाइजीन प्रोडक्ट्स में किया जाता हैं।

फिटकरी का इतिहास – History of Alum in Hindi

फिटकरी का इतिहास कई हजार साल पहले से मिलता हैं। फिटकरी के उपयोग एंसिएंट इजिप्ट और ग्रीस मैं देखने को मिलते हैं, जहां पर फिटकरी का यूज कपड़ों को डाई करने के लिए किया जाता था। रोम में फिटकरी का यूज मेडिसिन के रूप में और चोट लगने पर खून को रोकने के लिए किया जाता था। मिडल एज के दौरान यूरोप में फिटकरी के उत्पादन की जानकारी पहुंची। अपनी मेडिसिनल और ढाई करने की प्रॉपर्टी की वजह से वहां पर फिटकरी की डिमांड काफी बढ़ गई।

नौवीं शताब्दी में अब के विद्वान अल किंदी (Al-Kindi) ने फिटकरी के उत्पादन की प्रक्रिया को अपनी किताब में स्थान दिया, जिससे इस्लामिक एज में फिटकरी का यूज काफी तेजी से बढ़ने लगा। रेनेसां पीरियड के दौरान इटली और वेनिस में फिटकरी की डिमांड काफी तेजी से बढ़ने लगी। वेनिस इस समय पर फिटकरी का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया। फिटकरी का पूरी दुनिया में प्रचार प्रसार 16वीं सदी से 18 वीं सदी के बीच में हुआ, और जर्मनी हंगरी और ओटोमन एम्पायर में फिटकरी के उत्पादन काफी तेजी से बढ़ गया।

19वीं शताब्दी आते-आते फिटकरी का टेक्सटाइल इंडस्ट्री में काफी तेजी से प्रयोग किया जाने लगा। टेक्सटाइल इंडस्ट्री में फिटकरी कपड़ों में की जाने वाली डाई को फिक्स करने में मदद करती हैं। 20वीं शताब्दी से फिटकरी का यूज पानी को प्यूरिफाई करने स्किन केयर प्रोडक्ट्स बनाने और कलनरी यूजेस काफी तेजी से किया जाने लगा।

फिटकरी के प्रकार – Types of Alum in Hindi

फिटकरी के प्रकार उसमें मौजूद मैटेलिक कॉम्पोनेंट्स पर निर्भर करते हैं। नीचे फिटकरी के कुछ प्रकार बताए जा रहे हैं।

1. पोटैशियम एलम (Potassium Alum): फिटकरी के इस प्रकार को पोटाश एलम (Potash Alum) भी कहा जाता हैं। सबसे ज्यादा यूज फिटकरी के इसी प्रकार का किया जाता हैं। इसका केमिकल फार्मूला Kal(SO₄)₂·12H₂O हैं।

2. अमोनियम एलम (Ammonium Alum): फिटकरी का यह प्रकार पोटाश एलम जैसा ही होता हैं, लेकिन इसमें पोटेशियम की जगह अमोनियम होता हैं। इसका यूज फूड प्रोसेसिंग और प्रिजर्विंग के लिए किया जाता हैं। इसका केमिकल फार्मूला NH₄Al(SO₄)₂·12H₂O हैं।

3. सोडियम एलम (Sodium Alum): फिटकरी के इस प्रकार में मौजूद प्रॉपर्टीज सामान्य फिटकरी जितनी ही होती हैं, लेकिन यह काफी कम पाई जाती हैं। इस फिटकरी का यूज बेकिंग पाउडर में किया जाता हैं। इसका केमिकल फार्मूला NaAl(SO₄)₂·12H₂O हैं।

4. क्रोम एलम (Chrome Alum): फिटकरी के इस प्रकार में पोटेशियम की जगह क्रोमियम होता हैं। इसका यूज फोटोग्राफी और कपड़ों की डाई को फिक्स करने के लिए किया जाता हैं। इसका केमिकल फार्मूला KCr(SO₄)₂·12H₂O हैं।

5. आयरन एलम (Iron Alum): फिटकरी के इस प्रकार को फेरिक एलम (Ferric Alum) भी कहते हैं, क्योंकि इसमें सामान्य फिटकरी को तरह पोटेशियम की जगह आयरन होता हैं। इस फिटकरी का यूज वाटर प्यूरीफिकेशन आई वेस्टवाटर ट्रीटमेंट में किया जाता हैं। इसका केमिकल फार्मूला FeAl(SO₄)₂·12H₂O हैं।

6. एल्यूमीनियम सल्फेट (Aluminum Sulfate): इसको फिटकरी नही कहा जा सकता हैं, लेकिन इसकी प्रॉपर्टीज की वजह से फिटकरी के साथ ही रखा जाता हैं। इस फिटकरी में फ्लोकुलेटिंग प्रॉपर्टीज (छोटी छोटी गांठ बनाने की प्रॉपर्टी) होती हैं, जिसके इसका यूज पेपर इंडस्ट्री में किया जाता हैं। इसका केमिकल फार्मूला (Al₂(SO₄)₃) हैं।

फिटकरी के उपयोग – Uses of Alum in Hindi

फिटकरी का यूज बहुत सी इंडस्ट्रीज में बहुत से प्रोडक्ट्स बनाने और प्रोसिजर्स में किया जाता हैं।

वाटर प्यूरीफिकेशन:

फिटकरी में कोएगुलेटिंग प्रॉपर्टीज होती हैं, जिससे इसका वाटर ट्रीटमेंट में कोएगुलेंट का काम करके पानी से इंप्यूरिटीज को हटाकर प्यूरीफाई करता हैं।

फूड एडिटिव:

फिटकरी का यूज फर्मिंग एजेंट के तौर पर अचार और दूसरे प्रिजर्व्ड फूड में क्रिस्पीनेस को बढ़ाने के लिए किया जाता हैं।

कॉस्मेटिक्स:

फिटकरी की एस्ट्रिंगेंट प्रॉपर्टीज की वजह से इस का यूज डिओडरेंट और आफ्टर शेव लोशन में किया जाता हैं।

टैनिंग:

लेदर इंडस्ट्री में फिटकरी का यूज करके टैनिंग प्रोसेस के दौरान लेदर हाइड्स को सॉफ्ट करने के लिए किया जाता हैं।

फ्लेम रिटार्डेंट:

फिटकरी का यूज टैक्टाइल और पेपर इंसिड्ट्री में आग को बुझाने के लिए किया जाता हैं।

मेडिसिन:

फिटकरी में मौजूद एस्ट्रिंगेंट प्रॉपर्टीज की वजह से इसका मेडिसिनल यूज किया जाता हैं। इसका यूज ब्लीडिंग और स्वेलिंग को कम करने में किया जाता हैं।

फोटोग्राफी:

पुराने समय में फिटकरी का यूज फोटो को बनाने में किया जाता था।

क्राफ्ट्स:

फिटकरी का यूज बहुत से तरह के क्राफ्ट प्रोडक्ट बनाने में किया जाता हैं, क्योंकि यह क्रिस्टल फॉर्म में होता हैं, और लाइट को रिफ्लेक्ट काफी आसानी से करता हैं।

टेक्सटाइल इंडस्ट्री:

फिटकरी का यूज टेक्सटाइल इंडस्ट्री में कपड़ों के रंग को पक्का करने के लिए किया जाता हैं।

पेपर इंडस्ट्री:

फिटकरी में फ्लोकुलेटिंग प्रॉपर्टीज होती हैं, जो किसी वस्तु को इकट्ठा करके छोटे-छोटे गांठे बना देता हैं। इससे पेपर बनाने में आसानी होती हैं।

फिटकरी के फायदे – Benefits of Alum in Hindi

फिटकरी के हेल्थ बेनिफिट्स के बारे में बात की जाए तो इसका सेवन करना हमारे लिए नुकसानदेह हो सकता हैं, लेकिन इसमें कुछ ऐसी प्रॉपर्टीज मौजूद होती हैं, जिसकी वजह से इसका बाहरी प्रयोग करने पर काफी फायदा देखने को मिलता हैं। फिटकरी पाइल्स, मुंह के छालो, ओरल हेल्थ, स्किन इश्यूज, गले से जुड़े इशूज में फायदा करती हैं।

1. त्वचा के लिए फिटकरी के फायदे

फिटकरी को लेकर यह माना जाता हैं, कि त्वचा के लिए इसके बहुत से बेनिफिट्स होते हैं। फिटकरी में एस्ट्रिजेंट (Astringent) प्रॉपर्टीज होती हैं, जो त्वचा को कसाव प्रदान करता है जो की टाइट करके इसमें मौजूद पोर्स को कम करके स्किन हेल्थ में सपोर्ट करती हैं। फिटकरी में मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक प्रॉपर्टीज स्किन पर बैक्टीरियल ग्रोथ को रोक कर कील-मुंहासों और दाग-धब्बोंको कम करने में मदद कर सकती हैं और त्वचा को गोरा करने में मदद करती है।

फिटकरी का यूज नेचुरल डिओडरेंट के रूप में भी किया जाता हैं, क्योंकि इसमें ऐसी प्रॉपर्टीज होती हैं, जो बदबू करने वाले बैक्टीरिया को कंट्रोल करके बॉडी स्मेल को कम करती हैं। कुछ लोगों का यह भी माना हैं, कि फिटकरी स्किन लाइटनिंग में भी मदद करती हैं, हालांकि इसको लेकर साइंटिफिक प्रूफ काफी लिमिटेड हैं। फिटकरी में मौजूद एस्ट्रिजेंट और एंटीसेप्टिक प्रॉपर्टीज घाव को भरने, कटने और जलने में मदद कर सकती हैं। हालांकि फिटकरी का सेवन करने से बचना चाहिए और चेहरे से जुड़े बेनिफिट्स के लिए फिटकरी का केवल बाहरी प्रयोग किया जाना चाहिए।

2. दांतों के लिए फिटकरी के फायदे

फिटकरी का काफी पुराने समय से ओरल हेल्थ को बनाए रखने के लिए यूज किया जा रहा हैं। फिटकरी में मौजूद एस्ट्रिजेंट प्रॉपर्टीज कैंकर सोर में इन्फ्लेमेशन कम करके हेल्प कर सकती हैं। कैंकर सोर मसूड़े में नीचे की तरफ होते हैं। फिटकरी का एस्ट्रिजेंट नेचर छोटे गम इश्यूज में भी हेल्प करके ओवरऑल ओरल हेल्थ में मदद करता हैं। हालांकि ओरल हेल्थ के लिए फिटकरी का सेवन पाउडर रूप में माउथवॉश जैसे करना चाहिए।

3. चेहरे के लिए फिटकरी के फायदे

फिटकरी में मौजूद एस्ट्रिजेंट प्रॉपर्टीज स्किन को टाइट करती हैं, जिससे स्किन पोर्स में कमी आ सकती हैं। फिटकरी की एंटीसेप्टिक प्रॉपर्टीज एक्ने और स्किन में होने वाले बैक्टीरिया इन्फेक्शन को कम करके मदद करती हैं। फिटकरी की एस्ट्रिजेंसी प्रॉपर्टी चेहरे पर एक्सेस तेल के प्रोडक्शन को कंट्रोल करके ऑइली स्किन में मदद कर सकती हैं।

हालांकि चेहरे पर फिटकरी का प्रयोग करने से पहले पैच टेस्ट करना काफी जरूरी होता हैं, क्योंकि इससे सेंसेटिव स्किन वाले लोगों में स्किन इरिटेशन हो सकती हैं। इसके अलावा चेहरे पर फिटकरी का ज्यादा यूज करने से ड्राइनेस की समस्या बन सकती हैं।

4. बालों के लिए फिटकरी के फायदे

फिटकरी में मौजूद एस्ट्रिजेंट प्रॉपर्टीज स्कैल्प में तेल के प्रोडक्शन को कंट्रोल करके डैंड्रफ में मदद कर सकती हैं। इसके साथ ही फिटकरी में सूथिंग इफेक्ट होते हैं, और डेंड्रफ की कमी होने से स्कैल्प में खुजली की समस्या से भी निजात मिल सकती हैं। फिटकरी को स्कैल्प पर लगाने से पहले पैच टेस्ट कर लेना काफी जरूरी हैं।

5. डैंड्रफ के लिए फिटकरी के फायदे

फिटकरी में मौजूद एस्ट्रिजेंट प्रॉपर्टीज स्कैल्प की स्किन को टाइट करके एक्सेस तेल के प्रोडक्शन को कंट्रोल करते हैं, जिससे डैंड्रफ होने के चांसेस काफी कम हो जाते हैं। फिटकरी में नेचुरल एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज भी होती हैं, जो स्कैल्प पर बैक्टीरिया की ग्रोथ को कंट्रोल करके भी डैंड्रफ में कमी ला सकती हैं।

6. सिर के जुओं के लिए फिटकरी के फायदे

फिटकरी में मौजूद एस्ट्रिजेंट और एंटीमाइक्रोबॉयल प्रॉपर्टीज स्कैल्प पर होने वाले एक्सेस तेल के प्रोडक्शन को कंट्रोल करके जुओं पर कंट्रोल ला सकती हैं। इसके अलावा फिटकरी में ड्राइंग इफेक्ट होता हैं, जो स्कैल्प पर मॉइश्चर को कम करके भी मदद कर सकती हैं। जू के लिए ऑइली स्कैल्प काफी फेवरेबल होती हैं, जिससे बालों में जुओं की समस्या काफी ज्यादा हो जाती हैं। हालांकि कुछ लोगों का मानना हैं, की फिटकरी से जों में राहत मिल सकती हैं, लेकिन सेंसेटिव स्किन वाले लोगों को का उपयोग करने से बचना चाहिए।

7. अंडरआर्म्स के लिए फिटकरी के फायदे

फिटकरी में मौजूद एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज बॉडी में स्मेल कॉजिंग बैक्टीरिया की ग्रोथ को कम करके अंडरआर्म्स में होने वाली स्मेल को कम कर सकते हैं। फिटकरी माइल्ड एस्ट्रिजेंट का भी काम करता हैं, जिससे अंडर आर्म्स में मौजूद स्किन टाइट हो सकती हैं, और पोर्स का साइज भी कम हो सकता हैं।

इसके साथ ही फिटकरी का एस्ट्रिजेंट नेचर एक्सेसिव स्वेटिंग (ज्यादा पसीना आना) को भी कंट्रोल करता हैं। फिटकरी आर्टिफिशियल एंटीपरस्पिरेंट (Anti Perspirant) की जगह नेचुरल एंटीपरस्पिरेंट का काम करता हैं, जिससे कुछ लोगों में इसका पॉजिटिव इंपैक्ट देखने को मिल सकता हैं। कुछ लोगों में मार्केट में मौजूद डिओडरेंट जो की केमिकल से बने होते हैं, स्किन इरिटेशन ला सकते हैं, जिसमें फिटकरी नेचरली काम करके मदद कर सकती हैं।

8. एक्ने और पिंपल्स के लिए फिटकरी के फायदे

फिटकरी में मौजूद एस्ट्रिजेंट प्रॉपर्टीज स्किन को टाइट करके पोर्स में कमी लाती हैं, जिससे एक्ने होने के चांसेस काफी कम हो जाते हैं। फिटकरी में मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक प्रॉपर्टीज स्क्रीन पर बैक्टीरियल ग्रोथ को रोककर एक्ने और पिंपल को कम कर सकती हैं। इसके साथ ही फिटकरी एक्ने और पिंपल के लिए जिम्मेदार एक्सेस तेल को भी कंट्रोल करती हैं।

हालांकि कील-मुंहासों और दाग-धब्बों के लिए फिटकरी का इस्तेमाल करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना काफी जरूरी हैं। स्किन सेंसिटिव लोगों को फिटकरी का यूज करने से बचना चाहिए। फिटकरी का ज्यादा यूज करने से भी बचना चाहिए क्योंकि इससे स्किन ड्राइनेस की समस्या भी हो सकती हैं।

9. मुंह के छालों के लिए फिटकरी के फायदे

फिटकरी में मौजूद एस्ट्रिजेंट (Astringent) प्रॉपर्टीज की वजह से काफी पुराने समय से मुंह के छालों को ठीक करने के लिए इसका यूज किया जा रहा हैं। इसमें मौजूद एस्ट्रिजेंट प्रॉपर्टीज टिशु को छोटा करके इन्फ्लेमेशन में कमी आती हैं, जिससे माउथ अल्सर यानी मुंह के छालों में आराम मिल सकता हैं। फिटकरी में मौजूद एंटीसेप्टिक प्रॉपर्टीज मुंह में बैक्टीरियल ग्रोथ को कंट्रोल करके और रोक कर मुंह के छालों में आराम दे सकती हैं। हालांकि फिटकरी का यूज मुंह के छालों में केवल पाउडर रूप में माउथवॉश की तरह करना चाहिए।

10. गले के इंफेक्शन के लिए फिटकरी के फायदे

फिटकरी में मौजूद एस्ट्रोजन प्रॉपर्टीज टिशूज को टाइट करने में मदद करती हैं, जिससे गले के इन्फेक्शन (throat infection) में मदद मिल सकती हैं। फिटकरी में मौजूद एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज बैक्टीरियल ग्रोथ को रोककर भी इन्फेक्शन बढ़ने से बचा सकती हैं। गले के इन्फेक्शन में फिटकरी का यूज करने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि फिटकरी का यूज केवल पाउडर फॉर्म में माउथवॉश की तरह ही किया जाए। किसी भी तरह से फिटकरी का सेवन नहीं किया जाना चाहिए।

11. फंगल इन्फेक्शन के लिए फिटकरी के फायदे

फिटकरी में माइल्ड एंटीफंगल प्रॉपर्टीज होती हैं, जो फंगल इन्फेक्शन में फंगी की ग्रोथ को रोककर इंफेक्शन बढ़ने से रोकती हैं। फिटकरी में मौजूद एस्ट्रिजेंट (Astringent) प्रॉपर्टीज फंगल इन्फेक्शन में मॉइश्चर को कम करके इंफेक्शन को सुखाने में मदद कर सकती हैं। फंगल इन्फेक्शन में मॉइश्चर रहने पर फंगी की ग्रोथ काफी तेजी से होती हैं।

12. आंखों के लिए फिटकरी के फायदे

फिटकरी में मौजूद एस्ट्रिजेंट (Astringent) प्रॉपर्टीज काफी हेल्पफुल हो सकती हैं, लेकिन आंखों को लेकर फिटकरी का यूज काफी रिस्की हो सकता हैं। आंखों में फिटकरी का यूज करने से बचना चाहिए क्योंकि फिटकरी आंखों में रेडनेस और खुजली जैसे इश्यूज बना सकती हैं। इसके साथ ही आंखों के फिटकरी से सीधे संपर्क में आने पर आंख में मौजूद कॉर्निया यानी पर्दा डैमेज हो सकता हैं। आंखों में फिटकरी का उपयोग करने से देखने की क्षमता पर भी नेगेटिव असर हो सकता हैं।

13. मूत्राशय के लिए फिटकरी के फायदे

यूरिनरी हेल्थ यानी मूत्राशय से संबंधित इश्यूज में फिटकरी का यूज करने से उसमें मौजूद प्रॉपर्टीज की वजह से कुछ बेनिफिट हो सकता हैं। फिटकरी में मौजूद एंटी इन्फ्लेमेटरी प्रॉपर्टी यूरिनरी ट्रैक्ट में इन्फ्लेमेशन को कम करके यूटीआई यानी यूरिनरी ट्रैक्ट इनफेक्शंस को कम कर सकती हैं। फिटकरी में मौजूद एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज यूरिनरी सिस्टम में बैक्टीरिया इन्फेक्शन को खत्म करके और रोक कर यूरिनरी हेल्थ में सपोर्ट कर सकती हैं।

फिटकरी में मौजूद एस्ट्रिजेंट (Astringent) प्रॉपर्टीज यूरिनरी सिस्टम में मौजूद टिशूज को टाइट करके म्यूकस डिस्चार्ज को कम कर सकती हैं, जिससे एक्सेसिव सेक्रेशन मे कमी हो सकती हैं। ऊपर बताएंगे सभी हेल्थ बेनिफिट्स फिटकरी में मौजूद प्रॉपर्टीज की वजह से बताए गए हैं, हालांकि इसकी सच्चाई को लेकर साइंटिफिक एविडेंस लगभग ना के बराबर हैं। इसके साथ ही फिटकरी का सेवन करने से भी बचना चाहिए क्योंकि इससे हेल्थ बेनिफिट्स की जगह हेल्थ इश्यूज काफी हो सकते हैं।

14. दर्द और स्वेलिंग के लिए फिटकरी के फायदे

फिटकरी में मौजूद एस्ट्रिजेंट प्रॉपर्टीज की वजह से कटने फिटकरी को पानी के साथ हल्का पेस्ट बनाकर लगाने पर सूजन में कमी आ सकती हैं। फिटकरी को माउथवॉश के रूप में यूज करने पर मुंह के छाले यानी माउथ अल्सर में भी आराम हो सकता हैं। फिटकरी का यूज छोटे जलने के घाव पर भी किया जाता हैं, क्योंकि फिटकरी दर्द और इन्फ्लेमेशन को काम करके मदद कर सकती हैं।

फिटकरी का यूज कीड़ों के काटने पर भी किया जा सकता हैं, क्योंकि फिटकरी में मौजूद एंटीसेप्टिक प्रॉपर्टीज इंफेक्शन को रोक कर खुजली और स्वेलिंग को कम करने में मदद कर सकती हैं।

15. घावों के लिए फिटकरी के फायदे

फिटकरी में मौजूद एस्ट्रिजेंट (Astringent) प्रॉपर्टीज बॉडी टिशूज को टाइट करके घाव होने की स्थिति में खून के बहने को रोक कर, खून के जमने में मदद कर सकती हैं। इससे घाव जल्दी भरने के चांसेस काफी बढ़ जाते हैं। फिटकरी में माइल्ड एंटीसेप्टिक प्रॉपर्टीज होती हैं, जो घाव में इन्फेक्शन को रोक कर भी मदद करती हैं। इसके साथ ही फिटकरी घाव के आसपास होने वाली स्वेलिंग को कम करके घाव के जल्दी भरने में कंट्रीब्यूट करती हैं। कुछ स्टडीज बताती हैं, कि फिटकरी छोटे कट और घाव को जल्दी भरने में मदद कर सकती हैं।

16. पसीने की बदबू को रोकने में फिटकरी के फायदे

फिटकरी एस्ट्रिजेंट (Astringent) का काम करके स्किन टिशूज को टाइट करता हैं, जिससे कुछ हद तक पसीने का प्रोडक्शन कंट्रोल हो जाता हैं। फिटकरी में नेचुरल एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज होती हैं, जो पसीने में होने वाली बदबू के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया की ग्रोथ को कंट्रोल करके पसीने की बदबू को रोकने में मदद करती हैं।

फिटकरी के एस्ट्रिजेंट नेचर और एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज होने की वजह से इसका बॉडी पर डिओडराइजिंग इफेक्ट होता हैं, जिससे भी पसीने की बदबू रोकने में मदद मिलती हैं। पसीने की बदबू को रोकने के लिए फिटकरी का सीधा उपयोग अंडरआर्म्स या दूसरी पसीने वाली जगह पर करना चाहिए।

17. ऑयली स्किन के लिए फिटकरी के फायदे

फिटकरी स्किन से एक्सेस तेल को अब्जॉर्ब करके ऑयली स्किन में मदद करती हैं। फिटकरी में मौजूद एस्ट्रिजेंट (Astringent) प्रॉपर्टीज की वजह से यह स्किन को टाइट करके पोर्स के बनने को रोकते हैं, जिससे भी एक्सेस तेल के प्रोडक्शन पर कंट्रोल होता हैं। फिटकरी में मौजूद एंटीसेप्टिक प्रॉपर्टीज ऑयली स्किन से होने वाले एक्ने और पिंपल्स के साथ इन्फ्लेमेशन को भी काम करने में मदद कर सकती हैं। फिटकरी को स्क्रब के रूप में यूज किया जा सकता हैं, जिससे स्किन पर मौजूद डेड स्किन सेल्स को हटाने में आसानी होती हैं, और नई स्मूथ स्किन देखने को मिलती हैं।

18. कब्ज और अपच के लिए फिटकरी के फायदे

फिटकरी के काफी सारे हेल्थ बेनिफिट्स हैं, लेकिन डाइजेस्टिव इश्यूज को लेकर साइंटिफिक एविडेंस लगभग ना के बराबर हैं। फिटकरी एक केमिकल कंपाउंड हैं, इसके सेवन से बचना चाहिए। यदि फिटकरी का सेवन कर लिया जाए तो इससे पेट में जलन उल्टी और दूसरे डाइजेशन रिलेटेड इश्यूज देखने को मिल सकते हैं।

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19. बुखार खांसी बलगम और अस्थमा में फिटकरी के फायदे

फिटकरी का काफी पुराने समय से बहुत से हेल्दी यूज के लिए यूज किया जा रहा हैं, लेकिन बुखार खांसी बलगम और अस्थमा जैसे इश्यूज में फिटकरी का यूज करने से बचना चाहिए। बुखार खांसी बलगम और अस्थमा जैसे इश्यूज में फायदे के लिए दवा का सेवन जरूरी होता हैं, और फिटकरी के सेवन की सलाह नहीं दी जाती हैं। फिटकरी का सेवन करने पर बहुत से हेल्थ इश्यूज हो सकते हैं।

20. बवासीर में फिटकरी के फायदे

फिटकरी की बहुत से हेल्थ बेनिफिट्स हैं, और उनमें से एक हेल्थ बेनिफिट पाइल्स भी हैं। फिटकरी में मौजूद एस्ट्रिजेंट (Astringent) प्रॉपर्टीज की वजह से यह पाइल्स में होने वाली स्वेलिंग और इन्फ्लेमेशन को कम करके हेल्प कर सकती हैं।

फिटकरी में एस्ट्रिजेंट नेचर होने की वजह से इसमें हेमोस्टेटिक इफेक्ट भी होता हैं, जो पाइल्स के दौरान होने वाली ब्लीडिंग को कंट्रोल करके मदद कर सकता हैं। पाइल्स में फिटकरी का यूज करने के लिए हल्के गुनगुने पानी में कुछ मात्रा में फिटकरी को घोल लें और और उसमें अफेक्टेड एरिया को कुछ देर के लिए डुबोकर रखें।

21. म्यूकोसेल में फिटकरी के फायदे

म्यूकोसेल की कंडीशन में हमारे मुंह में मौजूद सैलिवरी ग्लैंड में गांठे पड़ जाती हैं। म्यूकोसेल की ट्रीटमेंट के लिए दवा का सेवन करना काफी जरूरी हैं, और जैसा कि ऊपर बताया गया हैं, फिटकरी का सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे हेल्थ बेनिफिट होने की जगह हेल्थ इश्यूज हो सकते हैं। हालांकि फिटकरी का पेस्ट बनाकर बाहर से लगाया जा सकता हैं, जिससे कुछ आराम देखने को मिल सकता हैं। म्यूकोसेल में फिटकरी के बेनिफिट को लेकर कोई भी साइंटिफिक प्रूफ नहीं हैं।

22. डार्क स्पॉट्स के लिए फिटकरी के फायदे

काले धब्बों को कम करने के लिए कई बार फिटकरी लगाने की सलाह दी जाती हैं, क्योंकि इसमें ऐसी प्रॉपर्टीज मौजूद होती हैं, जो कुछ मदद कर सकती हैं। फिटकरी में मौजूद एस्ट्रिजेंट (Astringent) प्रॉपर्टीज स्किन को टाइट करके पोर्स और डार्क स्पॉट होने के चांसेस काफी कम कर देती हैं।

फिटकरी को दरदरा पीस कर स्क्रब के रूप में यूज करने पर यह डेड स्किन सेल्स को हटाकर डार्क स्पॉट को कम करने में मदद कर सकती हैं। जिससे स्किन टोन में इंप्रूवमेंट देखने को मिल सकता हैं। कुछ लोग मानते हैं, कि फिटकरी में ऐसी प्रॉपर्टीज होती हैं, जो स्किन लाइटनिंग में कंट्रीब्यूट करके समय के साथ डार्क स्पॉट को खत्म कर सकती हैं। हालांकि डार्क स्पॉट्स के लिए फिटकरी का यूज करने से पहले पैच टेस्ट कर लेना काफी जरूरी हैं, वरना फिटकरी से इरिटेशन होने के चांसेस काफी बढ़ सकते हैं।

23. स्किन पोर्स के लिए फिटकरी के फायदे

फिटकरी में मौजूद एस्ट्रिजेंट (Astringent) प्रॉपर्टीज की वजह से यह स्किन को टाइट करके पोर्स के बढ़ने और नए पोर्स के बनने को रोकने में मदद कर सकती हैं। इसके साथ ही फिटकरी एक्सेस तेल के प्रोडक्शन को भी कंट्रोल करके पोर्स में मदद कर सकती हैं। फिटकरी में मौजूद एंटीसेप्टिक प्रॉपर्टीज एक्ने को खत्म करके पोर ब्लॉकेज होने से बचा सकती हैं।

इससे पोर्स के बढ़ने के चांसेस काफी कम हो जाते हैं। फिटकरी का यूज स्किन केयर रूटीनस में भी किया जाता हैं, इससे फिटकरी फेस टोनर का काम करती हैं, जो स्किन के पीएच लेवल को बैलेंस करके स्किन को स्मूथ बनती हैं।

24. फटी एड़ियों के लिए फिटकरी के फायदे

फिटकरी में मौजूद एस्ट्रिजेंट (Astringent) प्रॉपर्टीज स्किन को टाइट करने में मदद करती हैं, जिससे एड़ियों के फटने का चांसेस काफी कम हो जाते हैं। फिटकरी में एंटीसेप्टिक क्वालिटी होती हैं, जो फटी एड़ियों में इंफेक्शन होने के रिस्क को कम कर देती हैं। फिटकरी स्क्रब का भी काम करती हैं, जो एड़ियों में मौजूद डेड स्किन सेल्स को हटाकर एड़ियों की स्किन को स्मूथ बनाने में हेल्प कर सकती हैं।

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फिटकरी के नुकसान – Side Effects of Alum in Hindi

फिटकरी का ज्यादा मात्रा में और सही से उपयोग नहीं करने पर बहुत से हेल्थ इश्यूज देखने को मिल सकते हैं। फिटकरी का सेवन करने पर पेट में जलन उल्टी और डायरिया जैसे डाइजेशन से रिलेटेड इश्यूज हो सकते हैं। फिटकरी दस्त और उसके धुएं को सांस के द्वारा शरीर के अंदर लेने पर रेस्पिरेट्री ट्रैक्ट में जलन और इरिटेशन हो सकती हैं, जिससे खांसी और सांस लेने की समस्या बन सकती हैं।

फिटकरी को सीधे स्किन पर लगाने पर स्किन इरिटेशन रेडनेस और खुजली जैसे इश्यूज हो सकते हैं। इसके अलावा सेंसेटिव स्किन वाले लोगों में यह इश्यूज काफी ज्यादा दिक्कत कर सकते हैं। फिटकरी के आंखों में संपर्क में आने पर आंखों में इरिटेशन और रेडनेस देखने को मिल सकती हैं। जिससे आंखों के देखने की शक्ति पर भी नेगेटिव इंपैक्ट हो सकता हैं।

काफी ज्यादा मात्रा में और लगातार फिटकरी का सेवन करने से किडनी डैमेज होने के चांसेस काफी बढ़ जाते हैं। बहुत ही रेयर केसेस में फिटकरी से ज्यादा संपर्क में आने पर न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम देखने को मिल सकती हैं। इन सभी वजह से फिटकरी का सेवन करने से पहले स्पेशलिस्ट से सलाह लेना काफी जरूरी होता हैं।

फिटकरी के अन्य नाम – Other names of Alum

भाषाएंअन्य नाम
हिंदी/ तेलुगु/ मराठी/ कन्नड़ (Hindi/Telugu/Marathi/Kannada)फिटकरी (Phitkari)
संस्कृत (Sanskrit)स्फतिकरी/ सुरष्ट्रजा/ कामाक्षी/ तुवारि
(Sphatikari/ Surashtraja/ Kamakshi/ Tuvari)
सिंधी (Sindhi)फिटकी (Phitki)
बंगाली (Bengali)फिटकरी/ फटकिरी/ फटफड़ी
(Phitkari/ Phatkiri/ Phatphadi)
गुजराती (Gujarati)फटकरी (Phatkari)
पंजाबी (Punjabi)फटकरी (Fatkari)
तमिल (Tamil)पदिकरी/ पति करम/ पदिकरम/ शिनाकारूम
(Padikari/ Pati-Karam/ Padikharam/ Shinacarum)
मलयालम (Malyalam)फित्तुकरी (Fittukari)

फिटकरी का पोषक तत्व – Nutritional value of Alum in Hindi

फिटकरी खाद या पदार्थ नहीं हैं, इस वजह से इसका न्यूट्रिशन कंटेंट भी नहीं हैं। फिटकरी का सामान्य तौर पर वॉटर प्यूरिफिकेशन लेदर मेकिंग और दूसरे इंडस्ट्रियल यूजेस के लिए इस्तेमाल किया जाता हैं। फिटकरी का सेवन सेहत के लिए हानिकारक हो सकता हैं, और किसी भी प्रकार का उपयोग करने से पहले जरूरी दिशा निर्देश का पालन करना काफी महत्वपूर्ण होता हैं।

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फिटकरी की तासीर कैसी होती है?

फिटकरी की तासीर ठंडी होती हैं। हालांकि, फिटकरी का सावधानीपूर्वक और सही मात्रा में ही उपयोग करना चाहिए, क्योंकि अधिक मात्रा में फिटकरी का सेवन हानिकारक हो सकता हैं। हेल्थ रिलेटेड इश्यूज को लेकर फिटकरी का सेवन करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे अच्छा होता हैं।

फिटकरी कौन सी बीमारी में काम आती हैं?

पाइल्स।

सफेद फिटकरी क्या काम आती हैं?

सामान्य फिटकरी को ही सफेद फिटकरी कहा जाता हैं।

लाल फिटकरी किसे कहते हैं?

आयरन एलम को आयरन की मौजूदगी की वजह से लाल फिटकरी कहा जाता हैं।

लाल फिटकरी क्या काम आती हैं?

वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट में।

फिटकरी निगलने पर हानिकारक हैं?

हां।

मुंह में फिटकरी से कुल्ला करने से क्या होता हैं?

मुंह के छालों और बदबू से राहत मिल सकती हैं।

क्या फिटकरी का चूर्ण खा सकते हैं?

हां, सीमित मात्रा में।

निष्कर्ष

आज के इस लेख में आपने जाना की फिटकरी क्या होता है और फिटकरी के फायदे और नुकसान (Alum in Hindi) इस लेख को पूरा पढ़ने के बाद भी अगर आपके मन में Fitkari Ke Fayde aur Nuksan को लेकर कोई सवाल उठ रहा है तो आप नीचे Comment करके पूछ सकते हैं। हमारी विशेषज्ञ टीम आपके सभी सवालों का जवाब देगी।

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Akanksha Shree
आकांक्षा श्री ने पटना वीमेंस कॉलेज से इंग्लिश ऑनर्स में बैचलर्स और ट्रेवल एंड टूरिज्म में सर्टिफिकेशन कोर्स किया है। इन्होंने वर्ष 2023 में अपने करियर की शुरुआत स्वास्थ्य आधारित वेब पोर्टल से की थी। अब तक इनके 50+ से भी ज्यादा आर्टिकल प्रकाशित हो चुके हैं।

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